95 सूरह अत-तीन » Surah At-Tin in Hindi

95 सूरह अत-तीन » Surah At-Tin : इन्जीर की कसम और जैतून (2) और तूरे सीना (3) और इस अमान वाले शहर की (4) बेशक हम ने आदमी को अच्छी सूरत पर बनाया फिर

95 सूरह अत-तीन » Surah At-Tin in Hindi

सूरह अत-तीन » Surah At Tin : यह सूरह मक्किय्या है, | इस में आयतें : (8) | और  रुकूअ : (1) । और  कलिमे : (39) | और हर्फ़ : (157) । और तरतीब इ नुज़ूल : (28) | और तरतीब इ तिलावत : (95) | पारा : (30) |

सूरह अत-तीन » Surah At-Tin In Arabic

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
وَ التِّیْنِ وَ الزَّیْتُوْنِۙ(۱) وَ طُوْرِ سِیْنِیْنَۙ(۲) وَ هٰذَا الْبَلَدِ الْاَمِیْنِۙ(۳) لَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ فِیْۤ اَحْسَنِ تَقْوِیْمٍ٘(۴) ثُمَّ رَدَدْنٰهُ اَسْفَلَ سٰفِلِیْنَۙ(۵) اِلَّا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا وَ عَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ فَلَهُمْ اَجْرٌ غَیْرُ مَمْنُوْنٍؕ(۶) فَمَا یُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِالدِّیْنِؕ(۷) اَلَیْسَ اللّٰهُ بِاَحْكَمِ الْحٰكِمِیْنَ۠(۸)

सूरह अत-तीन - हिंदी में

अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

  1. वत तीनि वज़ ज़ैतून
  2. वतूरि सीनीन
  3. व हाज़ल बलादिल अमीन 
  4. लक़द खलक नल इनसाना फ़ी अहसनि तक़वीम
  5. सुम्मा रदद नाहू अस्फला साफिलीन
  6. इल्लल लज़ीना आमनू व अमिलुस सालिहाति फ़लहुम अजरुन गैरु ममनून
  7. फ़मा युकज्ज़िबुका बअदू बिददीन
  8. अलैसल लाहू बि अह्कमिल हाकिमीन

सुरह अत-तीन » हिंदी में अनुवाद

मैं अल्लाह तआला की पनाह में आता हूँ शैतान ने मरदूद से

अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान व रहम वाला | (1) 

इन्जीर की कसम और जैतून (2) और तूरे सीना (3) और इस अमान वाले शहर की (4) बेशक हम ने आदमी को अच्छी सूरत पर बनाया फिर उसे हर नीची से नीची सी हालत की तरफ़ फेर दिया (5) मगर जो ईमान लाए और अच्छे काम किये कि उन्हें बेहद सवाब है (6)  तो अब (7) क्या चीज़ तुझे इन्साफ़ के झुटलाने पर बाइस है (8) क्या अल्लाह सब हाकिमों से बढ़ कर हाकिम नहीं | ( तर्जुमा कंजुल ईमान हिंदी )  

सूरह अत-तीन » तशरीह हिंदी में

"सूरए वत्तीन" سورۃ ﴣ " मक्किय्या है, इस में एक रुकूअ, आठ आयतें, चोंतीस कलिमे, एक सो पांच हर्फ हैं। 2 : इन्जीर निहायत उम्दा मेवा है जिस में फुज्ला नहीं, सरीउल हज़्म, कसीरुन्न अ, मुलय्यिन, मुहल्लिल, दाफेए रेग, मुफ़त्तिहे सुद्दए जिगर, बदन का फ़र्बा करने वाला, बल्गम को छांटने वाला । जैतून एक मुबारक दरख्त है इस का तेल रोशनी के काम में भी लाया जाता है और बजाए सालन के भी खाया जाता है, येह वस्फ़ दुन्या के किसी तेल में नहीं, इस का दरख्त खुश्क पहाड़ों में पैदा होता है जिन में दुहनिय्यत (चिक्नाहट) का नामो निशान नहीं, बिगैर ख़िदमत के परवरिश पाता है, हज़ारों बरस रहता है, इन चीज़ों में कुदरते इलाही के आसार ज़ाहिर हैं। 3 : येह वोह पहाड़ है जिस पर अल्लाह तआला ने हज़रते मूसा عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ को कलाम से मुशर्रफ़ फ़रमाया और "सीना" उस जगह का नाम है जहां येह पहाड़ वाकेअ है या ब मा'ना खुश मन्ज़र के है जहां कसरत से फलदार दरख्त हों । 4 : या'नी मक्कए मुकर्रमा की 5 : या'नी बुढ़ापे की तरफ़ जब कि बदन ज़ईफ, आ'ज़ा नाकारा, अक्ल नाकिस, पुश्त खम, बाल सफेद हो जाते हैं, जिल्द में झुर्रियां पड़ जाती हैं, अपने जरूरिय्यात अन्जाम देने में मजबूर हो जाता है या येह मा'ना हैं कि जब उस ने अच्छी शक्ल व सूरत की शुक्र गुज़ारी न की और ना फ़रमानी पर जमा रहा और ईमान न लाया तो जहन्नम के अस्फ़ल तरीन दरकात (सब से नीचे वाले तब्कों) को हम ने उस का ठिकाना कर दिया। 6 : अगर्चे जो'फे पीरी के बाइस वोह जवानी की तरह कसीर ताअतें बजा न ला सकें और उन के अमल कम हो जाएं लेकिन करमे इलाही से उन्हें वोही अज्र मिलेगा जो शबाब और कुव्वत के ज़माने में अमल करने से मिलता था और इतने ही अमल उन के लिखे जाएंगे। 7 : इस बयाने कातेअ व बुरहाने सातेअ के बाद ऐ काफ़िर ! और तू अल्लाह तआला की येह कुदरतें देखने के बा वुजूद क्यूं बअस व हिसाब व जज़ा का इन्कार करता है। (Tarjuma Kanzul Iman Hindi  Ala Hazrat  رَضِیَ اللہُ تَعَالٰی)

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